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मेधावी बच्चों का राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने किया सम्मान

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने राजभवन के दरबार हाल में छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, रायपुर द्वारा वर्ष 2010 की हाईस्कूल तथा हायर सेकेण्डरी परीक्षा में प्रावीण्य सूची में आये मेधावी विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर तथा मेडल पहनाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भी उपस्थित थे। सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने सबसे पहले बच्चों, उनके अभिभावकों तथा गुरूजनों को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने युवाओं के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद के विचारों का स्मरण करते हुए बच्चों का आव्हान किया कि 'उठो, जागो और तब तक नहीं रूको, जब तक तुम्हारा लक्ष्य नहीं मिल जाता'। राज्यपाल ने बच्चों से यह भी कहा कि वे गिरने से नहीं डरें तथा जिंदगी में चुनौतियों को स्वीकार करें।

समारोह में राज्यपाल श्री दत्त ने मेधावी बच्चों हिन्दी एवं अंग्रेजी में प्रेरक कविताएं भी सुनायी। उन्होंने कहा कि  'तू जो चाहे, पर्वत-पहाड़ों को तोड़ दे। तू जो चाहे, धरती से अम्बर को जोड़ दे। तू जो चाहे, मिट्टी से अमृत निचोड़ दे'। श्री दत्त ने कहा कि हिन्दी की यह प्रेरणास्पद कविता उन्हें स्कूल शिक्षा मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने सुनाई। श्री दत्त ने इसी तरह अंग्रेजी कविता पढ़ते हुए उसके भावार्थ की जानकारी दी। कहा कि ''आप अपना लक्ष्य हमेशा ऊंचा रखें, फास्ट लेन में चलें और आपको कि यह कार्य किया जा सकता है तो उसे अवश्य करे, उसमें विजय मिलेगी। असंभव से लगने वाले कार्यों को भी न केवल ढूंढ कर निकाले बल्कि उसे पूरा करके भी दिखायें''। राज्यपाल ने प्रतिभाशाली बच्चों, उनके अभिभावकों तथा उनके गुरूओं के प्रमुख के रूप को उनकी उपलब्धि के लिए मुबारकबाद दी। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों से ही छत्तीसगढ़ राज्य और देश का भविष्य जुड़ा है। ऐसे बच्चे ही देश को आगे ले जाकर नयी ऊंचाईयों को छुएंगे। उन्होंने कहा कि अभिभावकों और शिक्षकों ने बच्चों को जो संस्कार और ज्ञान दिया है, वे उन्हें जिंदगी में काफी आगे ले जाएंगे।

प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि ये बच्चे अपने माता-पिता एवं गुरूजनों के साथ-साथ अपनी कड़ी मेहनत एवं परिश्रम की वजह से सम्मानित हो रहे हैं। इन बच्चों की जीवन की एक शुरूआत है और उन्हें एक लंबी यात्रा तय करनी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में शिक्षा का विस्तार हुआ है और राज्य से आई.आई.टी. जैसे संस्थानों में प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या तक 50-60 बढ़कर हो गई है। इसे और अधिक बढ़ाने के लिए प्रयास हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सुदूर अचंल के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार के बच्चों ने भी बड़ी संख्या में सफलता पाई है। छत्तीसगढ़ की युवा पीढ़ी देश एवं प्रदेश में किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी निभाने के लिए पूरी दक्षता के साथ तैयार हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे बड़े सपने देखें और जीवन के लिए ऊंचा लक्ष्य निर्धारित करें। वे असफल होने या गिरने से नहीं डरे, बल्कि इससे सीख लें।

स्कूल शिक्षा मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि जिन छात्रों को यहां सम्मानित किया जा रहा है, उनके कंधों पर देश एवं प्रदेश के भविष्य की जिम्मेदारी है। राज्य के ये बच्चे प्रतिभा संपन्न हैं, उनकी प्रतिभा को निखारने की जरूरत है। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अच्छी एवं प्रतिबध्द तैयारी के साथ प्रयास भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे को अपने को कम समझने की जरूरत नहीं है। हमारे गांव में भी प्रतिभा है और उसे दिखाने और सामने लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा प्रावीण्य सूची के पहले दस स्थानों के लिए 40-50 बच्चे आ रहे है और हम गुणवत्ता को संख्यात्मक रूप से भी बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे हैं।

आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रदेश के नक्सल प्रभावित तथा सुदूर क्षेत्रों के अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र के डेढ़ हजार बच्चों को रायपुर-दुर्ग के अच्छी संस्थाओं में पढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। इसी तरह राजनांदगांव में भी लगभग ढाई सौ बच्चों को प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थाओं में पढ़ाया जा रहा है। ये बच्चे जो पहले हिन्दी में भी ठीक से बात नहीं कर पाते थे, वे अब इंग्लिश भी अच्छे से बोलने में समर्थ बन गये हैं। उन्होंने बताया कि पहले प्रयास में व्यावसायिक परीक्षा में सफल नहीं होने वाले बच्चों के लिए कोचिंग उपलब्ध करायी गयी, जिसमें से लगभग 80 प्रतिशत बच्चे सफल हुए। उन्होंने प्रावीण्य सूची में आने वाले बच्चों को कहा कि वे दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत बनें तथा अपने आप को नये मानक बनायें।

कार्यक्रम के प्रारंभ में छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल के अध्यक्ष तथा स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री एम.के. राउत ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम के अंत में माध्यमिक शिक्षा मण्डल के सचिव श्री जे. मिंज ने आभार व्यक्त किया।