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छत्तीसगढ़ में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत 500 प्रतिशत बढ़ी : मुख्यमंत्री ने दी बधाई

जीरो पॉवर कट वाले छत्तीसगढ़ राज्य ने विगत दस वर्षो में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत में 500 प्रतिशत वृध्दि दर्ज की है। वर्ष 2009-10 में राज्य में प्रति व्यक्ति विद्युत खपत 1547 यूनिट दर्ज की गयी। लोकसभा में केन्द्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री के. वेणुगोपाल द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से विभिन्न राज्यों में बिजली की खपत की ताजा तस्वीर स्पष्ट हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की है।

 

डॉ. रमन सिंह ने कहा कि वास्तव में किसी भी राज्य में बिजली की खपत बढ़ना उस राज्य के विकास की निशानी है। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि इसके फलस्वरूप जहां प्रदेश के कृषि उत्पादन में भी लगातार वृध्दि हो रही है, वहीं औद्योगिक क्षेत्रों का उत्पादन भी नए शिखरों तक पहुंचा है।

उल्लेखनीय है कि राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों में प्रति व्यक्ति विद्युत खपत के आंकड़े, लोकसभा में ऊर्जा राज्य मंत्री श्री वेणुगोपाल द्वारा जारी किए गए हैं। विभिन्न राज्यों के तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार प्रथम तीन राज्यों में छत्तीसगढ़ भी शामिल है। गोवा 2263 यूनिट के साथ पहले स्थान पर, गुजरात 1615 यूनिट के साथ दूसरे स्थान पर और छत्तीसगढ़ 1547 यूनिट प्रति व्यक्ति विद्युत खपत के साथ तीसरे स्थान पर है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह गौरव का विषय है कि राज्य अब पहले से ही विकसित कहे जाने वाले, समृध्दि के मापदण्डों में गिने जाने वाले अनेक राज्यों से आगे हो गया है। लोकसभा में केन्द्र सरकार की ओर से दिए गए आंकड़ों के अनुसार विभिन्न राज्यों के प्रति व्यक्ति विद्युत खपत की स्थिति इस प्रकार है - पंजाब 1527, हिमाचल प्रदेश 1380, चण्डीगढ़ 1340, हरियाणा 1222, तमिलनाडु 1131, महाराष्ट्र 1128, उत्तराखण्ड 1112, आन्ध्रप्रदेश 967, जम्मू-कश्मीर 952, कर्नाटक 903, झारखण्ड 880, ओडिशा 874, राजस्थान 736, मध्यप्रदेश 602 यूनिट। न्यूनतम प्रति व्यक्ति विद्युत खपत के मामले में 112 यूनिट के साथ बिहार सबसे ऊपर है। इसके बाद क्रमश: उत्तरप्रदेश 348, केरल 525, पश्चिम बंगाल 550 यूनिट्स का नम्बर आता है। इस तरह यह स्पष्ट है कि तमाम कथित बड़े और विकसित राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ काफी अच्छी स्थिति में है। वर्ष 2009-10 में छत्तीसगढ़ की सकल घरेलू उत्पाद वृध्दि दर 11.49 प्रतिशत, देश में सर्वाधिक थी। विगत पांच वर्षो में राज्य की औसत विकास दर 10.9 प्रतिशत भी सर्वाधिक थी। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ की जीएसडीपी वृध्दि दर में कृषि क्षेत्र का बड़ा योगदान रहा है। विगत वर्ष कृषि क्षेत्र की राष्ट्रीय औसत विकास दर से गुजरात और छत्तीसगढ़ की विकास दर दोगुने से अधिक थी। विगत पांच वर्षो में निरन्तर विकास दर बढ़ने का भी एक बड़ा कारण कृषि क्षेत्र में विद्युत का योगदान रहा है। राज्य स्थापना के समय यहां मात्र 72 हजार सिंचाई पम्प कनेक्शन किसानों को दिए गए थे, जबकि राज्य शासन के विशेष प्रयासों और अभियानों के कारण अब राज्य में सिंचाई पम्प कनेक्शनों की संख्या दो लाख अस्सी हजार हो गयी है। ग्रामीण विद्युतीकरण का स्तर 97.8 प्रतिशत हो गया है। किसानों को छह हजार यूनिट बिजली नि:शुल्क दी जा रही है। एकलबत्ती कनेक्शनधारी 13 लाख उपभोक्ताओं को 30 यूनिट नि:शुल्क बिजली दी जा रही है। विभिन्न श्रेणी के विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या 18 लाख से बढ़कर करीब 33 लाख हो गयी है।

यह भी उल्लेखनीय है कि अभी पिछले ही महीने केन्द्र शासन ने छत्तीसगढ़ को देश में सर्वाधिक धान उत्पादन के लिए पुरस्कृत किया था। विगत दस वर्षो में राज्य में धान का उत्पादन 50 लाख मीटरिक टन से बढ़कर 91 लाख मीटरिक टन हो गया है। सिंचित रकबा 23 प्रतिशत से बढ़कर 32 प्रतिशत हो गया है। प्रति व्यक्ति आय 10 हजार रूपए वार्षिक से बढ़कर 44 हजार रूपए हो गयी है। राज्य में विद्युत के उत्पादन, पारेषण और वितरण में किए गए क्रांतिकारी सुधार के कारण हर क्षेत्र में बिजली का उपयोग बढ़ा है, जिसके कारण प्रति व्यक्ति विद्युत खपत में भी पांच गुने की वृध्दि दर्ज की गयी है। राज्य में घोषित तौर पर कटौती रहित निर्बाध आपूर्ति की जा रही है, जिसका विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन तथा उत्पादकता पर सकारात्मक प्रभाव दर्ज किया गया है। राज्य में कृषि क्षेत्र में उत्पादन निरन्तर बढ़ा है तो औद्योगिक क्षेत्रों का उत्पादन भी नए शिखरों तक पहुंचा है।